12 वर्षों की यात्रा में नेशनल लोक अदालत के माध्यम से प्री-लिटिगेशन सहित कुल 46 करोड़ 32 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया गया है। वहीं राज्य लोक अदालतों के जरिए 1 करोड़ 9 लाख मामलों का समाधान हुआ है। इसके अलावा परमानेंट लोक अदालतों ने भी 14 लाख 72 हजार मामलों में पक्षकारों को त्वरित राहत दी है।
शिवहर अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव ललन कुमार रजक ने बुधवार को जानकारी देते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में लोक अदालतों ने देश में न्याय को आम लोगों तक पहुंचाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में लगने वाली लोक अदालतें आज आपसी सहमति से विवादों के समाधान का सबसे बड़ा और भरोसेमंद मंच बन चुकी हैं।
इन 12 वर्षों की यात्रा में नेशनल लोक अदालत के माध्यम से प्री-लिटिगेशन सहित कुल 46 करोड़ 32 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया गया है। वहीं राज्य लोक अदालतों के जरिए 1 करोड़ 9 लाख मामलों का समाधान हुआ है। इसके अलावा परमानेंट लोक अदालतों ने भी 14 लाख 72 हजार मामलों में पक्षकारों को त्वरित राहत दी है। डालसा सचिव श्री रजक ने कहा कि लोक अदालत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां दोनों पक्षों की सहमति से विवाद समाप्त होता है, जिससे न कोई हारता है और न कोई जीतता है। इससे सामाजिक रिश्तों में कड़वाहट नहीं आती और सौहार्द बना रहता है।

साथ ही मुकदमेबाजी में लगने वाले समय और धन की भी बचत होती है। लोक अदालत में सुनाए गए फैसले के विरुद्ध कोई अपील नहीं की जा सकती, जिससे मामले का अंतिम निपटारा तुरंत हो जाता है। उन्होंने बताया कि बैंक ऋण, बिजली-पानी के बिल, पारिवारिक विवाद, मोटर दुर्घटना दावा और चेक बाउंस जैसे लाखों मामलों का यहां समाधान हुआ है। इससे नियमित न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ भी कम हुआ है। आम लोग अब छोटे विवादों के लिए वर्षों तक अदालतों के चक्कर लगाने से बच रहे हैं।अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने नागरिकों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में लोक अदालतों का लाभ उठाएं। अगली राष्ट्रीय लोक अदालत की तिथि जल्द घोषित की जाएगी। इच्छुक पक्षकार अपने मामलों के निपटारे के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार कार्यालय नंबर 7070092435 पर संपर्क कर सकते हैं।
जिला संवाददाता...संजीत कुमार
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