भारत की एकता… अखंडता… और मजबूत राष्ट्र निर्माण की जब भी बात होती है, तो सबसे पहले जिस महान व्यक्तित्व का नाम सामने आता है, वो हैं देश के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल!
भारत की एकता… अखंडता… और मजबूत राष्ट्र निर्माण की जब भी बात होती है, तो सबसे पहले जिस महान व्यक्तित्व का नाम सामने आता है, वो हैं देश के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल!
मोतीहारी : एक ऐसा व्यक्तित्व, जिन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति, अदम्य साहस और दूरदर्शी नेतृत्व से आजाद भारत को एक सूत्र में पिरोने का ऐतिहासिक काम किया। देश की 562 से अधिक रियासतों का भारतीय संघ में विलय कराकर उन्होंने भारत की एकता और अखंडता को नई पहचान दी। यही वजह है कि इतिहास के पन्नों में उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।
इसी महान राष्ट्रनायक की 151वीं जयंती के अवसर पर मोतिहारी के पटेल चौक पर पटेल सेवा संघ की ओर से जयंती कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
जहां शहर के जदयू कार्यकर्ताओं, समाजसेवियों और शिक्षाविदों ने सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस मौके पर उपस्थित लोगों ने सरदार पटेल के संघर्षपूर्ण जीवन, राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण और देश को एकजुट करने में उनकी ऐतिहासिक भूमिका को याद किया।
वक्ताओं ने कहा कि सरदार पटेल जैसे दृढ़ इच्छाशक्ति वाले नेतृत्व की आज भी देश को जरूरत है। अगर आज वे हमारे बीच होते, तो भारत को और अधिक मजबूत बनाने में उनका मार्गदर्शन महत्वपूर्ण होता।
वही इस कार्यक्रम के मौके पर आए हुवे सभी समाजसेवीयों और कार्यकर्ताओं को मोमेंटों दे कर सम्मानित किया गया | 
सरदार वल्लभभाई पटेल भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, कुशल राजनीतिज्ञ और देश के पहले उपप्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री थे। उनका जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था। उनके पिता का नाम झवेरभाई पटेल और माता का नाम लाडबाई था।
वल्लभभाई पटेल ने अपनी मेहनत और लगन से शिक्षा प्राप्त की तथा वकालत के क्षेत्र में सफलता हासिल की। महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर वे स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हुए। उन्होंने खेड़ा सत्याग्रह और बारडोली सत्याग्रह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बारडोली सत्याग्रह की सफलता के बाद उन्हें ‘सरदार’ की उपाधि मिली।

भारत को 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता मिलने के बाद सरदार पटेल देश के पहले उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री बने। उस समय भारत में अनेक रियासतें थीं। उन्होंने अपनी कुशल नेतृत्व क्षमता और दृढ़ इच्छाशक्ति से अधिकांश रियासतों का भारत में विलय कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी कारण उन्हें ‘भारत का लौह पुरुष’ कहा जाता है।
सरदार पटेल का जीवन देशभक्ति, साहस, अनुशासन और एकता का प्रतीक है। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन देश की सेवा में समर्पित कर दिया।
15 दिसंबर 1950 को मुंबई में उनका निधन हो गया। देश के प्रति उनके अमूल्य योगदान के सम्मान में गुजरात में उनकी विशाल प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का निर्माण किया गया, जिसका उद्घाटन 31 अक्टूबर 2018 को हुआ था।
सरदार वल्लभभाई पटेल भारत की एकता और अखंडता के महान निर्माता थे। उनका जीवन हमें देशप्रेम, दृढ़ संकल्प और राष्ट्रीय एकता का संदेश देता है। भारतवासी उन्हें सदैव श्रद्धा और सम्मान के साथ याद करते रहेंगे।
कार्यक्रम में पटेल सेवा संघ के जिला अध्यक्ष दीपक पटेल, मोतिहारी विधायक प्रमोद कुमार, प्रोफेसर दिनेश चंद्र प्रसाद , jdu के जिलाध्यक्ष भरत पटेल , प्रकाश अस्थाना, विधि प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष प्रकाश चौधरी, बबन कुशवाहा , मोतिहारी नगर निगम के भावी उपमहापौर संजीत कुमार उर्फ मुन्ना कुमार, पटेल सेवा संघ के माहासचिव विनोद कुमार पटेल, अमरेन्द्र सिंह ,अजय गुप्ता , श्री कान्त कुमार, डॉ ओम प्रकाश , बृजमोहन गुप्ता , राजेश कुमार , रिपु सूदन तिवारी , लक्ष्मण पासवान , आरके सिंह , बद्री पासवान , कैप्टन हामिद अंसारी , इसरत जहां , खुर्शीद अजीज , रामबालक सिंह कुशवाहा , कुणाल सिंह पटेल , सुनील भूषण ठाकुर , रमाकांत राकेश (अधिवक्ता ) , सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे। सरदार पटेल का जीवन हमें यही संदेश देता है कि मजबूत राष्ट्र का निर्माण एकता, अनुशासन और दृढ़ संकल्प से ही संभव है।
संवाददाता - राकेश कुमार
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